गुरुवार, 24 जून 2010

तमन्ना थी

कुछ इस तरह से वक़्त बदला
जानने वाला हर शख्स बदला
आज दिलो में है फासला ,
गिरते गिरते वह शायद ही संभला ,
तमन्ना थी हर पल साथ की,
पर क्या शिकायत करू उससे,
जब अँधेरा  देख मेरा साया बदला
                --- प्रतिभा शर्मा  

4 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

बहुत अच्छी रचना

Sunil Kumar ने कहा…

sundar abhivyakti

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

जज़्बात खूबसूरती से लिखे हैं.....वर्ड वेरिफिकातिओं हटा लें..टिप्पणी देने में सरलता होगी

Shekhar Kumawat ने कहा…

bahut khub