बुधवार, 8 सितंबर 2010

मासूम

खिलती हुई एक
मासूम सी कली है ,
लिये हाथ में
बेबसी की लाठी है ,
आँखों में झलकती
गहन वेदना है ,
लेकिन पेट की आग
बुझाने की मज़बूरी में ,
द्रड़ता के साथ बढ़ा रही है
कदम हवा में !!!
           -- प्रतिभा शर्मा

1 टिप्पणी:

माधव ने कहा…

कारुरिक और सच व्यक्त करती रचना